खैरागढ़. करीब 90 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन राजनांदगांव-खैरागढ़ सड़क की गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवालों के बीच रविवार को जांच टीम खैरागढ़ पहुंची। लगातार खबरों के प्रकाशन और लिखित शिकायत के बाद गठित टीम ने दोपहर में निर्माणाधीन सड़क का मौके पर निरीक्षण किया। लोक निर्माण विभाग के अधिकारी चार से पांच वाहनों में खैरागढ़ के सोनेसरार स्थित चोपड़ा पेट्रोल पंप के सामने पहुंचे और सड़क निर्माण में इस्तेमाल हो रहे मटेरियल के सैंपल एकत्र किए।

निर्माणाधीन सड़क की पहली डामर परत कई जगह से उखड़ने और गिट्टियां बाहर निकलने के बाद इसकी गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। सड़क की सतह कई हिस्सों में ऊबड़-खाबड़ दिखाई दे रही है। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने निर्माण में तकनीकी मानकों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए सामग्री की गुणवत्ता, डामर की मोटाई और रोलर कॉम्पैक्शन की जांच की मांग उठाई है।
बारिश बनी वजह या निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल?

लोक निर्माण विभाग का कहना है कि सड़क पर अभी डामर की दो और परतें बिछाई जानी हैं। खैरागढ़ की उप अभियंता स्मारिका तिवारी के मुताबिक बारिश और पानी की वजह से पहली परत का कुछ हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ है, जिसे काटकर दोबारा डामरीकरण कराया जाएगा। लेकिन सवाल यह है कि निर्माण पूरा होने से पहले ही पहली परत के उखड़ने की वजह केवल बारिश है या निर्माण सामग्री और तकनीकी गुणवत्ता में भी कोई कमी रही है।
शिकायत के बाद गठित हुई चार सदस्यीय जांच समिति
मामले को लेकर जिला सहकारी केंद्रीय बैंक राजनांदगांव के उपाध्यक्ष भरत लाल वर्मा ने सितंबर 2026 में राजनांदगांव-खैरागढ़ और राजनांदगांव-मोहला-मानपुर सड़क परियोजनाओं में कथित भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत की थी। शिकायत में उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई थी। इसके बाद लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता विजय कुमार भतपहरी ने 2 अक्टूबर 2026 को चार सदस्यीय जांच समिति गठित करने का आदेश जारी किया।

रविवार को टीम के मौके पर पहुंचने के बाद सड़क निर्माण में इस्तेमाल सामग्री और डामर के सैंपल लिए गए। इन सैंपलों की जांच के बाद ही सड़क की गुणवत्ता को लेकर तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
हालांकि, निरीक्षण के दौरान जब पत्रकारों ने अधिकारियों से मौके पर जांच और सैंपलिंग को लेकर जानकारी चाही तो अधिकारी कैमरे के सामने कुछ भी कहने से बचते नजर आए। अधिकारियों ने मौके पर बयान देने के बजाय बाइट के लिए राजनांदगांव आने की बात कही। ऐसे में अब निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं कि करोड़ों रुपये की इस सड़क में गुणवत्ता के सवालों पर जांच समिति क्या निष्कर्ष सामने रखती है।


