खबरों का प्रहरी न्यूज. रानी रश्मि देवी सिंह शासकीय महाविद्यालय खैरागढ़ में दो दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का शुभारंभ
00 ‘साइंटिफिक इनोवेशन इन ग्रीन सोसाइटी’ विषय पर पर्यावरण संरक्षण एवं वैज्ञानिक नवाचार पर हुआ विमर्श

खैरागढ़. रानी रश्मि देवी सिंह शासकीय महाविद्यालय खैरागढ़ में प्राचार्य डॉ. ओ.पी. गुप्ता के मार्गदर्शन तथा विज्ञान संकाय एवं आईक्यूएसी के संयुक्त तत्वावधान में “साइंटिफिक इनोवेशन इन ग्रीन सोसाइटी” विषय पर दो दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का शुभारंभ 29 अक्टूबर को हुआ।
कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में सीईओ जिला पंचायत खैरागढ़-छुईखदान-गंडई श्री प्रेमकुमार पटेल, मुख्य वक्ता डॉ. दीप्ति चौहान (सहायक प्राध्यापक, वनस्पतिशास्त्र, भिलाई महिला महाविद्यालय), विशिष्ट अतिथि जे.के. वैष्णव (पूर्व छात्रसंघ प्रभारी) एवं अध्यक्षता प्रभारी प्राचार्य डॉ. जितेन्द्र कुमार साखरे ने की।
मुख्य अतिथि श्री पटेल ने छात्रों से पर्यावरण संरक्षण को जीवन का हिस्सा बनाने का आग्रह करते हुए वृक्षारोपण, प्लास्टिक निषेध, सौर व पवन ऊर्जा तथा अपशिष्ट प्रबंधन जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि “छोटी-छोटी अच्छी आदतें भी हरित समाज की दिशा में बड़ा परिवर्तन ला सकती हैं।”

प्रभारी प्राचार्य डॉ. साखरे ने अपने स्वागत उद्बोधन में विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को समानांतर रूप से अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया और छात्रों से वैज्ञानिक नवाचार के माध्यम से समाजहित में योगदान करने का आह्वान किया।

मुख्य वक्ता डॉ. दीप्ति चौहान ने ‘ग्रीन सोसाइटी’ पर अपने पीपीटी प्रेजेंटेशन में कबाड़ से जुगाड़, वाटर हार्वेस्टिंग, हर्बल कलर निर्माण, ग्रीनरी डेवलपमेंट और पेस्टिसाइड निर्माण जैसे विषयों पर उदाहरण प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि किस प्रकार छात्र पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ इन नवाचारों के माध्यम से रोजगार के नए अवसर भी सृजित कर सकते हैं।
विशिष्ट अतिथि जे.के. वैष्णव ने भारत की प्राचीन वैज्ञानिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि “विज्ञान और अध्यात्म का संतुलन ही पर्यावरण संरक्षण की मूल कुंजी है।” उन्होंने ओजोन दिवस और विश्व पर्यावरण दिवस जैसे आयोजनों के महत्व को भी रेखांकित किया।
सत्र का संचालन यशपाल जंघेल ने किया तथा आभार प्रदर्शन सुरेश आडवाणी ने किया। कार्यशाला की संयोजक मनीषा नायक ने प्रस्तावना प्रस्तुत की।
द्वितीय तकनीकी सत्र में आमंत्रित वक्ता हड्डी रोग विशेषज्ञ वैद्य शेखू राम वर्मा (देवरी) ने आयुर्वेद को भारत की अमूल्य धरोहर बताते हुए स्थानीय जड़ी-बूटियों से उपचार की पारंपरिक पद्धतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्वस्थ जीवनशैली के लिए उचित आहार-विहार की महत्ता बताई।
पैनल डिस्कशन सत्र में नाड़ी रोग विशेषज्ञ वैद्य सुमरन जंघेल (कुलीकसा) और नर्व विशेषज्ञ वैद्य जगदीश चंदेल (भोरमपुर) उपस्थित रहे। उन्होंने बताया कि किस प्रकार परंपरागत ज्ञान के सहारे जटिल रोगों का निदान संभव है। इस सत्र का संचालन डॉ. उमेंद चंदेल ने किया और आभार सृष्टि वर्मा ने व्यक्त किया।
कार्यशाला के सफल संचालन में सचिव सहायक प्राध्यापक भबीता मंडावी, सतीश माहला, मोनिका जत्ती, परमेश्वरी टांडिया, शबाना खान, खेमपाल, ऐश्वर्या वर्मा, राकेश वर्मा, निशा दुबे, अश्वनी वर्मा और खुशबू सिन्हा सहित समस्त संकायजनों का सराहनीय योगदान रहा।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में प्राध्यापकगण, शोधार्थी तथा स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर के छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।




