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खैरागढ़. इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय फिर विवादों में: 14 सूत्रीय मांगों पर कर्मचारियों की हड़ताल, प्रशासन पर गंभीर आरोप—कुलसचिव ने आरोपों को बताया निराधार

साकेत श्रीवास्तव
03-02-2026 04:35 PM

खबरों का प्रहरी न्यूज. इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय फिर विवादों में: 14 सूत्रीय मांगों पर कर्मचारियों की हड़ताल, प्रशासन पर गंभीर आरोप—कुलसचिव ने आरोपों को बताया निराधार
खैरागढ़. एशिया के पहले संगीत विश्वविद्यालय के रूप में पहचान रखने वाला इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ एक बार फिर गहरे प्रशासनिक विवाद के केंद्र में आ गया है। गैर-शिक्षक कर्मचारी संघ एवं कर्मचारी कल्याण संघ के संयुक्त तत्वावधान में विश्वविद्यालय के सैकड़ों कर्मचारी 14 सूत्रीय मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। कर्मचारियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर मानसिक उत्पीड़न, पक्षपात, दुर्व्यवहार, नियमविरुद्ध पदभार और विकास में बाधा पहुंचाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।

कर्मचारी संघ ने कुलपति को सौंपे औपचारिक ज्ञापन में स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य विश्वविद्यालय की छवि को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि संविधान, कानून और शैक्षणिक मूल्यों के अनुरूप संस्थान को सुरक्षित रखना है। संघ का कहना है कि लगातार मानसिक दबाव, अपमानजनक व्यवहार और प्रशासनिक अनियमितताओं के कारण कर्मचारियों का कार्यस्थल असुरक्षित होता जा रहा है।
मानसिक उत्पीड़न और भय का माहौल बनाने के आरोप
कर्मचारियों का आरोप है कि प्रभारी कुलसचिव डॉ. सौमित्र तिवारी एवं सहायक कुलसचिव राजेश गुप्ता द्वारा कर्मचारियों के साथ निरंतर मानसिक उत्पीड़न किया जा रहा है। सार्वजनिक रूप से अपमानित करना, धमकीपूर्ण भाषा का प्रयोग, गाली-गलौज, दुर्व्यवहार तथा निजी स्तर पर भय का वातावरण बनाना अब आम बात हो गई है। इससे विश्वविद्यालय का सौहार्दपूर्ण, अनुशासित एवं शैक्षणिक वातावरण प्रभावित हो रहा है।
अनुचित कार्यभार और नियमों की अनदेखी
संघ का कहना है कि कर्मचारियों पर बिना पद, सेवा नियम एवं कार्य-विवरण के अनुरूप अनुचित और असंगत कार्यभार थोपा जा रहा है, जो श्रम कानूनों और प्रशासनिक मर्यादाओं के विपरीत है। कई मामलों में फाइलों को जानबूझकर दिनों तक लंबित रखा जाता है, जिससे न केवल प्रशासनिक कार्य बाधित होते हैं बल्कि विश्वविद्यालय के विकास कार्य भी ठप पड़ जाते हैं।
कुलसचिव पद को लेकर बड़ा सवाल
हड़ताल के प्रमुख बिंदुओं में यह प्रश्न भी शामिल है कि किस प्रकार एक सहायक प्राध्यापक द्वारा विधिक प्रक्रिया, आवश्यक प्रशासनिक अनुभव और विश्वविद्यालय के स्थापित सेवा नियमों के विपरीत कुलसचिव पद का दायित्व ग्रहण किया गया। कर्मचारियों का आरोप है कि प्रभारी कुलसचिव द्वारा स्वयं को ‘रजिस्ट्रार/कुलसचिव’ कहलाने का दबाव भी बनाया जा रहा है, जो विधिक व्यवस्था और प्रशासनिक मर्यादा के खिलाफ है।
वरिष्ठता, पदोन्नति और वेतनमान पर असंतोष
कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में गलत वरिष्ठता सूची जारी करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई, वरिष्ठता के आधार पर पात्र कर्मचारियों को पदोन्नति, 10 वर्ष की सेवा पूर्ण कर चुके कर्मचारियों को समयमान वेतनमान का लाभ, एकल पदों पर कार्यरत कर्मचारियों के लिए पदोन्नति चैनल तैयार करना, सातवें वेतनमान के आधार पर पेंशन तथा पुरानी पेंशन योजना का लाभ शामिल है। सेवानिवृत्त एवं दिवंगत कर्मचारियों के आश्रितों को भी समयमान वेतनमान का लाभ देने की मांग की गई है।
आंतरिक सूचनाओं के लीक होने का आरोप
संघ ने विश्वविद्यालय के आंतरिक बिलों और देयकों से संबंधित सूचनाओं के सामान्य जन तक पहुंचने पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं और इस पर तत्काल अंकुश लगाने की मांग की है। कर्मचारियों का कहना है कि अधूरी, भ्रामक और तथ्यों से रहित जानकारियों के आधार पर जनप्रतिनिधियों को विश्वविद्यालय के विरुद्ध उकसाया जा रहा है, जिससे संस्थान की छवि को नुकसान हो रहा है।
धरने का बदला स्वरूप, अधिकारियों से आमना-सामना
अब तक अंबेडकर चौक या कैंपस-2 के मुख्य द्वार के बाहर धरना देने वाले कर्मचारी इस बार कैंपस-2 प्रांगण के भीतर कुलपति के शासकीय वाहन के सामने धरने पर बैठ गए। कर्मचारियों ने कुलपति के साथ-साथ कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को भी ज्ञापन सौंपा।
प्रभारी कुलसचिव डॉ. सौमित्र तिवारी ने धरनास्थल पर पहुंचकर कर्मचारियों से बातचीत की और उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने समयमान वेतनमान, पदोन्नति और वरिष्ठता जैसे मुद्दों पर विचार करने की बात कही, लेकिन कर्मचारियों के साथ मानसिक प्रताड़ना और दुर्व्यवहार के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया।
लगातार विवादों से धूमिल होती साख
गौरतलब है कि विश्वविद्यालय में पूर्व कुलपति ममता चंद्राकर के कार्यकाल से लेकर वर्तमान कुलपति प्रो. डॉ. लवली शर्मा तक लगातार विवाद की स्थिति बनी रही है। वर्तमान कुलपति के कार्यभार संभालने से पहले ही विरोध के स्वर उठने लगे थे और अब कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
विशेषज्ञों और शिक्षाविदों का मानना है कि कर्मचारियों और प्रशासन के बीच तालमेल की भारी कमी विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा, शैक्षणिक माहौल और विकास के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन संवाद और निष्पक्ष कार्रवाई के जरिए इस गतिरोध को कैसे समाप्त करता है।
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